कोई

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई |

मेरे अध् मरे से ख्वाब अगर ज़िंदा है,

तो आँखों में नींद भी आये, ये समझाये कोई |

किनारे पर पहुंचने की ये कश्मकश,

डूबने वाले को भी दिखलाये कोई |

चाँद, आशमा, ये तारे और फलक,

अँधेरे से इस घर में रोशनी तो जलाये कोई |

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई |


Urdu meanings in English

मंज़र (manzar): A scene

कश्मकश (kashmakash): Tussle

रूह (ruuh): Soul

Reference : https://www.rekhta.org/urdudictionary/

आईना

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ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर है मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.

दरख्तों के शोर -गुल अब लगते हैं ऐसे,

कि हर एक घोंसले में बाज़ नज़र आता है.

राह के लोग अब होते नहीं अंजान,

कि हर एक चेहरें में अपना माज़ी नज़र आता है.

तुमने आँसू बेकार ही जाया किये होंगे,

कि हर एक दरिया में समंदर नज़र आता है.

ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर हैं मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.

अनकही

नादाँ मेरे, बस इतना बता

इस मोड़ मुड़ा तो होगा कोई ?

ये राख़ भरी सी बस्ती में,

कभी शहर बसा तो होगा कोई?

जहाँ सुनते हो तुम सिसकारि,

एक लम्हा हँसा तो होगा कोई?

क़दमों में उड़ते हो ख़ाक जहाँ,

होगा आँगन में खिलता फूल कोई ?

नादाँ मेरे बस इतना बता,

इस मोड़ मुड़ा तो होगा कोई?