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Urdu poems and recitals

सहरा

 
सहरा में चला था मैं,रोया ना था कोई,
रोया तो बस फूट के रोया, मेरे पैरों का छाला| 
 
क्या करूं मैं, अब हाले-सूरत को बयां, 
बस हाथ से न छूटा मय का वो प्याला|
 
जीने के कयास में कहीं मर न जाते,
सांसों को मेरी बस धड़कनों ने संभाला|
 

Urdu meanings in English

सहरा(sahraa): Desert

कयास (qayaas): supposition, guess

 

Reference : https://www.rekhta.org/urdudictionary/

उसूल, Urdu poems and recitals

हालते -ये – फरामोश

ना मैं तेरा ही हुआ, ना हुआ उसूलों का,

एक आसूँ ना रहा, ना डर रहा छलक जाने का|

मुझसे रुस्वाई भी हैं और कई मुश्किल भी,

मेरे पास ये बहाना भी ना रहा, रूठ जाने का|

कतरा कतरा ही रिसा करता हूँ,

अब कोई चारा ना रहा संभल जाने का|

बड़ी जुल्मत भी रही और रही तंजीयत भी,

कई बार इरादा भी हुआ वादे से मुकर जाने का|

ना मैं तेरा ही हुआ, ना हुआ उसूलों का|

Urdu poems and recitals

आशुफ्ता (Aashufta)

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शाम है, गम है, तन्हाई है,

इस आशुफ्ता से मेरी सदियों की आशनाई हैl

तुम ने हथेलियों पे नन्हे से ख्वाब छोड़े हैं,

डूब जाता मैं, लहरों ने मात खाई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

की ज़माने से नहीं हम वबस्त,

क्या बताऊँ कि आँख क्यों भर आई हैl

दुखों का आलम ना पूछ हमसे,

सूखी हुईं धरती पर बरसात आई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

सहमे हुए लोगों को यहाँ देखा है,

ना मालूम हुआ वो मेरी ही परछाई हैl

जागते हुए आखों को अब नींद कहाँ,

कभी फुरक़त, कभी फुर्शत की दुआ आई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

अपने जज़्बात, नज़रो से बयां होने दो,

हम तो समझेंगे, एक ही ज़ुबा पाई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl


Urdu meanings in English

आशुफ्ता (aashufta): Uneasiness

आशनाई (aashnaa.ii): Friendship

फुरक़त (furqat): Absence

Reference : https://www.rekhta.org/urdudictionary/

Urdu poems

कोई

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई |

मेरे अध् मरे से ख्वाब अगर ज़िंदा है,

तो आँखों में नींद भी आये, ये समझाये कोई |

किनारे पर पहुंचने की ये कश्मकश,

डूबने वाले को भी दिखलाये कोई |

चाँद, आशमा, ये तारे और फलक,

अँधेरे से इस घर में रोशनी तो जलाये कोई |

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई |


Urdu meanings in English

मंज़र (manzar): A scene

कश्मकश (kashmakash): Tussle

रूह (ruuh): Soul

Reference : https://www.rekhta.org/urdudictionary/

Urdu poems

आईना

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ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर है मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.

दरख्तों के शोर -गुल अब लगते हैं ऐसे,

कि हर एक घोंसले में बाज़ नज़र आता है.

राह के लोग अब होते नहीं अंजान,

कि हर एक चेहरें में अपना माज़ी नज़र आता है.

तुमने आँसू बेकार ही जाया किये होंगे,

कि हर एक दरिया में समंदर नज़र आता है.

ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर हैं मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.

Urdu poems

अनकही

नादाँ मेरे, बस इतना बता

इस मोड़ मुड़ा तो होगा कोई ?

ये राख़ भरी सी बस्ती में,

कभी शहर बसा तो होगा कोई?

जहाँ सुनते हो तुम सिसकारि,

एक लम्हा हँसा तो होगा कोई?

क़दमों में उड़ते हो ख़ाक जहाँ,

होगा आँगन में खिलता फूल कोई ?

नादाँ मेरे बस इतना बता,

इस मोड़ मुड़ा तो होगा कोई?

Urdu poems

प्यास

दौर शुरू हुआ नज़ाकत से शरारत का,

वो लम्हा था एहतराम उल्फत का,

बस एक प्याला था, टूट गया,

नहीं है हम पेरशान………………..

ना जाने क्यों,

कम्बख्त प्यास सी लगी रहती है हमेशा.

Urdu poems

फ़लसफ़ा

थक जाऊ, ज़रा आराम तो हो,

चला जाता हूँ कब से , ये सफ़र कैसा.

पाया हैं, वो भी बहोत कुछ,

छूटता जाता हैं , हथेलियों पे रेत् जैसा .

मंज़िल – उसकी आरज़ू तो ना थी ,

अंधा दौड़ हैं बस, ना जाने कैसा .

सांसे अभी बाक़ी हैं मुझमें,

फूटेगी – पानी के बुल बुले जैसा.

Urdu poems and recitals

अंज़ाम

Anjaam

लहरों से दोस्ती की हमने,

मुझें तो डूब के मरना था,

यहीं आगाज़ था मेरा, यहीं अंज़ाम होना था.

रह ना सका कोई, सिर्फ “मैं ” के सिवा,

काफ़िला जहाँ का, मुझें तो भीड़ मे खोना था.

किस किस को दिखाऊ, ये रंग ख़ून -ये -जिग़र का,

प्याला रहा सामने, मुझें तो प्यासा ही रहना था.

यहीं आगाज़ था मेरा, यहीं अंज़ाम होना था.