कोई

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई I

मेरे अध् मरे से ख्वाब अगर ज़िंदा है,

तो आँखों में नींद भी आये, ये समझाये कोई I

किनारे पर पहुंचने की ये कश्मकश,

डूबने वाले को भी दिखलाये कोई I

चाँद, आशमा, ये तारे और फलक,

अँधेरे से इस घर में रोशनी तो जलाये कोई I

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई I

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