कफ़स

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Via Giphy

 

मैं होता या ना होता,

क्या होता मेरे होने से.

मैं बदलूँ तो क्या बदलूँ,

स्याह के रंग रह गये तन्हा होने से.

रंगों के मिज़ाज से ही रंगीनियत होनी थी,

मेरे तो सब रंग रह गये मेरे बदरंग होने से.

ना बन पाया कोई काम मेरे फ़ना होने का,

ज़ज़्बात से चराग़ भी रोशन न हुऐ लौं के होने से.

मैं होता या ना होता,

क्या होता मेरे होने से.

फलक, आशमाँ से तारे तोड़ लाता मैं,

बस हाथ ना बढ़ा पाया उसके अक्दस होने से.

मेरे इख़्तेयार में थी जहां की आशनाई,

पर तमाशबीं रहा दुनियां के होने से.

कफ़स में क़ैद अंजीदा कैसे ना होता कोई,

तमाम उम्र गुज़र गईं मेरे अफ़गन होने से.

मैं होता या ना होता,

क्या होता मेरे होने से…….

 


Urdu meanings:

अक्दस= Sacred/Holy

इख़्तेयार= Domain/ Right

आशनाई= Friendship

तमाशबीं= Viewer

कफ़स = Human body

अंजीदा = Wounded

अफ़गन = Destroyer/ Killer

8 thoughts on “कफ़स

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