आशुफ्ता

 

 

 

 

 

 

 

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शाम है, गम है, तन्हाई है,

इस आशुफ्ता से मेरी सदियों की आशनाई हैl

तुम ने हथेलियों पे नन्हे से ख्वाब छोड़े हैं,

डूब जाता मैं, लहरों ने मात खाई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

की ज़माने से नहीं हम वबस्त,

क्या बताऊँ कि आँख क्यों भर आई हैl

दुखों का आलम ना पूछ हमसे,

सूखी हुईं धरती पर बरसात आई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

सहमे हुए लोगों को यहाँ देखा है,

ना मालूम हुआ वो मेरी ही परछाई हैl

जागते हुए आखों को अब नींद कहाँ,

कभी फुरक़त, कभी फुर्शत की दुआ आई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl

अपने जज़्बात, नज़रो से बयां होने दो,

हम तो समझेंगे, एक ही ज़ुबा पाई हैl

शाम है, गम है, तन्हाई हैl


Meaning:

आशुफ्ता : Uneasiness

आशनाई : Friendship

फुरक़त : Absence

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कोई

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई I

मेरे अध् मरे से ख्वाब अगर ज़िंदा है,

तो आँखों में नींद भी आये, ये समझाये कोई I

किनारे पर पहुंचने की ये कश्मकश,

डूबने वाले को भी दिखलाये कोई I

चाँद, आशमा, ये तारे और फलक,

अँधेरे से इस घर में रोशनी तो जलाये कोई I

दिलों का वास्ता अगर रूह से होता,

तो सीने में दर्द का मंज़र बतलाये कोई I

आईना

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ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर है मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.

दरख्तों के शोर -गुल अब लगते हैं ऐसे,

कि हर एक घोंसले में बाज़ नज़र आता है.

राह के लोग अब होते नहीं अंजान,

कि हर एक चेहरें में अपना माज़ी नज़र आता है.

तुमने आँसू बेकार ही जाया किये होंगे,

कि हर एक दरिया में समंदर नज़र आता है.

ना परवाही की आदत अब कुछ इस क़दर हैं मुझ में,

कि ख़ून का रंग भी सफ़ेद नज़र आता है.