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हालते -ये – फरामोश

ना मैं तेरा ही हुआ, ना हुआ उसूलों का, एक आसूँ ना रहा, ना डर रहा छलक जाने का| मुझसे रुस्वाई भी हैं और कई मुश्किल भी, मेरे पास ये बहाना भी ना रहा, रूठ जाने का| कतरा कतरा ही रिसा करता हूँ, अब कोई चारा ना रहा संभल जाने का| बड़ी जुल्मत भी रही… Continue reading हालते -ये – फरामोश

सहरा

  सहरा में चला था मैं,रोया ना था कोई, रोया तो बस फूट के रोया, मेरे पैरों का छाला|    क्या करूं मैं, अब हाले-सूरत को बयां,  बस हाथ से न छूटा मय का वो प्याला|   जीने के कयास में कहीं मर न जाते, सांसों को मेरी बस धड़कनों ने संभाला|   Urdu meanings… Continue reading सहरा


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